हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है, इसका महत्व, पौराणिक कथा तथा पूजा विधि


 

हरियाली तीज three अगस्त, 2019

तृतीया तिथि – शनिवार, three अगस्त 2019

तृतीया तिथि प्रारंभ- 1 बजकर 37 मिनिट से

तृतीया तिथि समाप्त- 22 बजकर 06 मिनिट तक

हिन्दू धर्म में तीज-त्यौहार मनाने का अपना एक विशेष महत्व है। श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज व्रत करने का विधान है। यह पर्व अविवाहित और विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। हरियाली तीज को कज्जली व्रत, सावन तीज, सिंधरा तीज, छोटी तीज, श्रावणी तीज, अखा तीज के नाम से भी लोग जानते है। इस पर्व को मेहंदी रस्म भी कहते है। यह पर्व मुख्यतः सुहागनों का व्रत है, इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। सुहागन स्रियों के लिए इस व्रत का अत्याधिक महत्व होता है। अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार हरियाली तीज जुलाई या अगस्त के महीने में आती है। हरियाली तीज के इस पावन अवसर पर देश भर में कई जगह मेले लगते है, इस मनोरम क्षण का आनन्द लेने के लिए महिलाएं झूले झूलती है, साज श्रृंगार करती है तथा लोक गीत गाकर इस पर्व को मनाती है। इस पर्व की खासियत यही है की सौन्दर्य और प्रेम का यह उत्सव भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

Importance of hariyali teej

हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है? इसकी पौराणिक कथा क्या है, आइये हम जानते है-

हिन्दू धर्म में हर व्रत का पौराणिक महत्व है, तथा उससे जुड़ी कोई न कोई रोचक कहानी व कथा होती है। इस पर्व की खासियत यही है की सौन्दर्य और प्रेम का यह उत्सव भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। 108 जन्मों की लम्बी अवधि के बाद और देवी पार्वती की महान तपस्या और प्रार्थनाओ की वजह से भगवान शिव ने आखिरकार देवी पार्वती को हरियाली तीज के शुभ दिन पर अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था, जो इस दिन को हिन्दू संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण बना देता है। तभी से ऐसी मान्यता है की भगवान शिव और माता पार्वती ने इस दिन को सुहागन स्रियों के लिए सौभाग्य का दिन होने का वरदान दिया। इसलिए यह प्रथा प्रचलित हो गई की इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का सच्चे मन से पूजन और व्रत करने से विवाहित स्रियाँ सौभाग्यशाली और सौभाग्यवती रहतीं है और उनके परिवार में सुख-शांति, धन और वैभव की प्राप्ति होती है।

हरियाली तीज का व्रत रखने के पीछे का तथ्य

सावन महीने में आनेवाली तीज यानि हरियाली तीज पर सुहागन महिलाएं एक सफल वैवाहिक जीवन का आनन्द लेने के लिए देवी पार्वती की पूजा आरती, स्तुति करती है और भगवान से प्रार्थना करती है। महिलायें इस दिन का व्रत अपने पतियों के कल्याण, अच्छे स्वास्थ्य, और दीर्घायु की कामना हेतु रखती है।

नवविवाहित लडकियाँ तीज उत्सव पर विवाह के बाद अपने पहले सावन के त्यौहार को मनाने के लिए हरियाली तीज के दिन अपने ससुराल से अपने पीहर आती है। गर्मी और रिमझिम बरसात के इस सुहावने मौसम में हरियाली तीज पृथ्वी के नए और मन मोहक दिखने का एक बहुत ही खूबसूरत उत्सव है। इस दिन महिलायें दुल्हन की तरह सजती है, झूले झूलती है, नए-नए वस्र, आभूषण पहनती है, मेहंदी लगाती है, वो नजारा देखने में बहुत ही अद्भुत होता है।

हरियाली तीज के दिन सौभाग्य, धन तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए क्या धारण करें  

दो मुखी रुद्राक्ष

दो मुखी रुद्राक्ष में साक्षात शिव-भगवान तथा देवी पार्वती का वास होता है। इसे अर्धनारीश्वर का स्वरुप भी कहा गया है। दो मुखी रुद्राक्ष को देवेश्वर भी कहा जाता है। यह रुद्राक्ष बहुत ही कल्याणकारी तथा लाभकारी होता है। इस रुद्राक्ष को मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए धारण किया जाता है। ऐसा माना जाता है की रुद्राक्ष शिव का वरदान है, जो संसार के भौतिक दुखों को दूर करने के लिए भगवान शिव ने इस धरती पर प्रकट किया है। हरतालिका या हरियाली तीज के दिन दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने के बाद दाम्पत्य जीवन में मधुरता के साथ सौभाग्य का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

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गौरी-शंकर रुद्राक्ष

हरियाली तीज के पावन अवसर पर दाम्पत्य जीवन के सुख के लिए गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करना अति शुभ माना जाता है। इस रुद्राक्ष के प्रभाव से भगवान शिव तथा पार्वती माँ का आशीर्वाद मिलता है, शिव-पार्वती जैसा दाम्पत्य सुख पाने के लिए गौरी शंकर रुद्राक्ष उत्तम है। भगवान शिव और माँ पार्वती का प्रत्यक्ष रूप है गौरी शंकर रुद्राक्ष। साथ ही साथ जिन जातकों के विवाह में किसी तरह की बाधा आ रही है तो उन्हें गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करने से अवश्य ही फायदा पहुंचता है।

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हरियाली तीज पर सिंधरा का महत्व

माता-पिता द्वारा अपनी बेटी को सिंधरा के रूप में उपहार दिए जाते है, जिसके अंतर्गत सुहाग का सामान, घेवर, फैनी, मिष्ठान्न, आदि चीजे शामिल होती है, इस सामान में नए कपड़ों से लेकर श्रृंगार का सारा सामान दिया जाता है। हरियाली तीज के दिन विवाहित महिलाओं को दी गई यह उपहार स्वरुप भेंट जिसे सिंधरा कहते है, इसलिए भी यह सिंधरा तीज के रूप में भी बहुत प्रसिद्ध है। 

हरियाली तीज और पूजा विधि

इस पर्व की खासियत यही है की सौन्दर्य और प्रेम का यह उत्सव भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। शिवपुराण के अनुसार हरियाली तीज का सुहागन स्रियों के लिए बड़ा महत्व है, आइये जानते है इसकी पूजा विधि के बारे में

हरियाली तीज के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद नए वस्त्र धारण करें, उसके बाद मन में पूजा करने का संकल्प लें और ॐ नमः शिवाय, ॐ पार्वत्ये नमः का जाप करना चाहिए। उसके बाद विधि विधान से पूजा आरम्भ करनी चाहिए। पूजा शुरू करने से पूर्व काली मिट्टी से भगवान शिव और माँ पार्वती तथा भगवान गणेश की मूर्ति बनाएं, फिर थाली में सुहाग की सामग्रियों को सजा कर माता पार्वती को अर्पण करें। ऐसा करने के बाद भगवान शिव को वस्त्र चढ़ाएं तथा तीज की कथा सुने या स्वयं पढ़े।

हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है, इसका महत्व, पौराणिक कथा तथा पूजा विधि

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