कब से है मलमास? जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण


इस बार मलमास की अवधि 16 दिसम्बर 2018 से लेकर 14 जनवरी 2019 तक है। मलमास आखिर होता क्या है, इसके पीछे क्या वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण है, इन दिनों में शुभ कार्य क्यों नहीं किये जाते इन सबके बारे में हम विस्तार से जानेंगे परन्तु उससे पहले आइए अब हम जानते है की मलमास आखिर होता क्या है।

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क्या होता है मलमास?

प्राचीन काल से ही शास्त्रों में मलमास को दूषित महीने के रूप में जाना जाता है  यह एक अशुभ महीना है इस महीने कोई भी शुभ कार्य नहीं किये जाते जैसे- सगाई, शादी या इससे जुडा हुआ कोई भी काम, मकान का मुहूर्त या मकान की नीव रखना, मकान या कोई जमीन -जायदाद खरीदना, गृह-प्रवेश या इससे जुडा हुआ कोई भी काम, नवीन व्यापार की शुरुआत, बच्चे का नामकरण, बच्चे का मुंडन आदि शुभ कार्य नहीं किये जाते

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सूर्य जब भ्रमण करते है तब एक महीने तक एक राशि में रहते है सूर्य 12 महीनों में 12 राशियों में भ्रमण करते है। बृहस्पती की दो रशिया है धनु और मीन, जब सूर्य भ्रमण करते हुए धनु और मीन राशि में आते है तो उस मास को मलमास कहते है।

विवाह तथा अन्य शुभ कार्य के लिए क्यों अशुभ माना जाता है?

जब सूर्य अत्याधिक तेज और ऊर्जा वाला होता है और बृहस्पति की राशि मीन की ओर गोचर करता है तो बृहस्पति का तेज कम पड़ जाता है। इतना ही नहीं इसका प्रभाव स्वयं सूर्य पर भी पड़ता है। इन दोनों ही ग्रहों में कोई बल या शक्ति नहीं बचती तो ऐसे में यह समय विवाह तथा अन्य शुभ कार्य करने के लिए शुभ और सही नहीं माना जाता।

मलमास में क्या करना चाहिए?

  • इस मास में भगवान् विष्णु की पूजा तुलसी के पत्तों के साथ करनी चाहिए, तथा उन्हें मीठी खीर या मीठे पदार्थ का भोग अवश्य लगाना चाहिए इन दिनों में धार्मिक घाट पर स्नान करना चाहिए तथा अपनी योग्यता अनुसार दान करना चाहिए
  • इस मास में जो भी एकादशी आती है उस दिन व्रत करने चाहिएसुबह ब्रह्म मुहूर्त अर्थात सुबह  जल्दी उठकर स्नान करके भगवान् विष्णु का दूध से अभिषेक करना चाहिए, दूध में थोडासा केसर अवश्य मिलाये उसके बाद भगवान् विष्णु जी को तुलसी के पत्तों की माला डाले और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम: का 108 बार जाप करे
  • इस माह में आप जितना दान-पुण्य करेंगे उसी मात्रा में आपके जीवन में सुख-समृद्धि आयेगी
  • दोस्त आप चाहते है की आपके जीवन में जो भी आपकी इच्छाए है उनकी पूर्ति हो तो इस माह में भगवान् विष्णु जी का ध्यान अवश्य करे तथा जो काम इस महीने वर्जित है वो गलती से भी नहीं करने चाहिये उसके बाद आपको स्वयं को ही अपने जीवन में हो रहे बदलाव का आभास होगा

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